संसाधन
एनआरईजीए पर संसाधन सामग्री का चयन
आलेख और पत्र
मल्टिप्लायर ऐक्सेलेटर एनआरईजीए
मिहीर शाहद हिन्दू | लीडर पृष्ठ | 30/4/2009
अर्थशास्त्र से लिया गया मल्टिप्लायर (गुणक) व ऐक्सेलेटर (गतिवर्धक) का सिद्धांत एनआरईजीए की विशाल क्षमता को उजागर करता है और ऐसे मानकों के निर्धारण में मदद करता है कि इस पर विचार आवश्यक है। पिछले कुछ महीनों में, जैसे ही अर्थव्यवस्था ने मौजूदा आर्थिकमंदी के दौर में प्रवेश किया मुख्यधारा की मीडिया ने, जो अब तक समान रूप से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की बुराई करती आ रही थी, अचानक से इसकी तारीफ के राग अलापना शुरु कर दिया।
डाउनलोड पीडीएफ
लेख को ऑनलाइन पढ़ें
शारीरिक श्रम व विकास
मिहीर शाहइकोनॉमिक व पॉलिटिकल वीकली | 20/12/2008
कपूर, मुखोपाध्याय व सुब्रमनियन के लेख सीधा नकदी हस्तांतरण' (डायरेक्ट कैश ट्रान्स्फर यानि डी.सी.टी) पर मेरी आलोचना के जवाब में उन्होने (इ.पी.डब्ल्यू, 22 नवंबर, 2008, आगे से के.एम.एस) ने कहा "यह विचार कि ज्यादातर शारीरिक श्रम द्वारा टिकाऊ अधोसंरचना बनाना मनोरंजक होगा, अगर यह गैरजिम्मेदाराना नहीं हो तो" (पृ.87)। दुःख की बात है कि इस तरह के वक्तव्य राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को बढ़ावा देने वालों के बीच भी आम हैं।
डाउनलोड पीडीएफ
सीधा नकदी हस्तांतरण के बारे में और विचार
देवेश कपूर, पार्था मुखोपाध्याय, अरविंद सुब्रमनियमइकोनॉमिक व पॉलिटिकल वीकली | नवंबर/2008
हमारे पत्र कपूर, मुखोपाध्याय व सुब्रमनियन (12 अप्रैल 2008, पीपी 37-43, आगे से केएमएस) के जवाब में मिहीर शाह (23 अगस्त 2008, पीपी 77-79, आगे से एमएस) ने कई दावे किए हैं। एक दावा यह है कि केएमएस सीधा नकदी हस्तांतरण (डी.सी.टी) के विचारों के सर्वश्रेष्ठ हिमायती के रूप में उभरे हैं।
डाउनलोड पीडीएफ
सीधा नकदी हस्तांतरण अपने में कोई रामबाण नहीं
मिहीर शाहद हिन्दू | लीडर पृष्ठ | 20/9/2008
गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम तभी कार्य करेंगे जब वे सतत आजीविका और दान पर निर्भरता को खत्म करने की ओर अग्रसर होंगे। इसमें ताकतवर लोगों के संस्थानों, उपयुक्त प्रौद्योगिकी, कौशल विकास,बाजार नियंत्रण और पर्याप्त सार्वजनिक निवेश की आवश्यकता है।
डाउनलोड वर्ड डॉक्युमेंट
लेख को ऑनलाइन पढ़ें
एनआरईजीएः आंध्र प्रदेश रास्ता दिखा रहा है
मिहीर शाह & प्रमथेष अम्बष्टद हिन्दू | लीडर पृष्ठ | 8/9/2008
आंध्र प्रदेश में एनआरईजीए के सोशल ऍाडिट की सफलता, जो 1.2 करोड़ लोगों तक पहुंची, नागरिक सामाजिक कार्यवाही का एक शानदार उदाहरण है जो कि मुख्यधारा की राजनीति को रास्ता दिखाती है। युनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंज का अप्रत्याशित रूप से सत्ता में आने का एक प्रमुख कारण भारत के गांवों में गहरा संकट था।
डाउनलोड पीडीएफ
लेख को ऑनलाइन पढ़ें
सीधा नकदी हस्तांतरणः कोई जादुई गोली नही
मिहीर शाहइकोनॉमिक व पॉलिटिकल वीकली | 23/8/2008
भारत में गरीबी में कमी सीधा नकदी हस्तांतरण जैसे समाधानों से कहीं ज्यादा की मांग करती है।
डाउनलोड पीडीएफ
एनआरईजीए के दो वर्ष : हम यहॉं से कहॉं जाते हैं?
संतोष मेहरोत्राइकोनॉमिक व पॉलिटिकल वीकली | 2/8/2008
यह आलेख 2005 के मध्य में अपनी शुरूआत के बाद से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम के प्रदर्शन की जॉंच करता है। यह पहले कुछ क्षेत्रों में हुए विकास के सार को दर्शाता है और फिर विशिष्ट कमजोरियों को उजागर करता है।
डाउनलोड पीडीएफ
एनआरईजीए का असली प्रजातंत्रवाद
मिहीर शाहद हिन्दू | लीडर पृष्ठ | 22/5/2008
युवा झारखंड कार्यकर्ता ललित मेहता की नृशंस हत्या एनआरईजीए के प्रजातंत्रवादी प्रावधानों द्वारा दी गई गहरी धमकी निहित स्वार्थों के हिंसक विरोध को पूरी तरह से बेनकाब करती है। 14 मई 2008 को विकास सहयोग केन्द्र में पूर्णकालिक कार्यकर्ता ललित कुमार मेहता की कंदरा के जंगल से घर वापस जाते वक्त हत्या कर दी गई थी।
डाउनलोड पीडीएफ
लेख को ऑनलाइन पढ़ें
शासन का सुधार एनआरईजीए के सफलता की कुंजी
मिहीर शाहद हिन्दू | लीडर पृष्ठ | 14/3/2008
वह कार्यान्वयन संरचना जो कि दशकों से ग्रामीण विकास में विफल रही है, एनआरईजीए द्वारा पारित मौलिक रूप से नए कार्यक्रम के लिए दोबारा से उपयोग में नहीं लाई जा सकती है। मुशकिल से दो वर्ष ही हुए हैं और राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एनआरईजीए) को हटाने के लिए चिल्लाहट शुरू हो गई है।
डाउनलोड पीडीएफ
लेख को ऑनलाइन पढ़ें
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम के दो वर्ष : आगे की राह
प्रमथेष अम्बष्ट, पी एस विजय शंकर तथा मिहीर शाहइकोनॉमिक व पॉलिटिकल वीकली | 23/02/2008
भारतीय लोकतंत्र जिसके प्रत्येक सूत्र भ्रष्टाचार, असक्षमता और गैर जिम्मेदारी के ताने बाने से बुने गए हैं उसमें जब तक हम राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (एनआरईजीए) के कारयान्वयन की संरचना को कार्यान्वित नहीं करते हे, इस मूलतः नए कार्यक्रम के विशाल सामर्थ्य को ज+मीन पर उतार पाना संभव नहीं है। दूसरी ओर यदि इस दस्तावेज में सुझाए गए सुधारों को लागू किया जाए तो एनआरईजीए में देश के सबसे गरीब लोगों के जीवनयापन को रूपांतरित करने तथा भारत के ग्रामीण अधिशासन में एक क्रांति का आगाज करने की प्रबल संभावना है।
डाउनलोड पीडीएफ
रोजगार गारंटीः अभी तक का विकास
ललित माथुरइकोनॉमिक व पॉलिटिकल वीकली | 29/12/2007
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम कार्यान्वयन के अपने दूसरे वर्ष में है। अधिनियम और उसके कार्यन्वयन की आलोचना करना आसान है।
डाउनलोड पीडीएफ
एनआरईजीएः ठेकेदार राज का निराकरण
जॅन ड्रेजद हिन्दू | लीडर पृष्ठ | 20/11/2007
पश्चिमी उड़ीसा में एनआरईजीए पर एक ताजा सर्वेक्षण ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों में शोषण की पारंपरिक प्रणाली को बनाए रखने की ओर लक्षित पारदर्शिता रक्षोपायों के तोड़-फोड़ की ओर इंगित करता है। एक समय की बात है, उड़ीसा (या उस पूरे भारत में) में ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम निजी ठेकेदारों और उनके राजनीतिक गुरूओं के हाथों में था।
डाउनलोड वर्ड डॉक्युमेंट
लेख को ऑनलाइन पढ़ें
रोजगार गारंटी, नागरिक समाज और भारतीय लोकतंत्र
मिहीर शाहइकोनॉमिक व पॉलिटिकल वीकली | 17/11/2007
चाहे हम भारतीय लोकतंत्र के 60 सालों का जश्न मनाऐं, हमारे लाखों लोग भूखे, घबराए और असुरक्षित हैं और जो कि राज्य या अतिवादियों की बंदूकों की नालों के साये में जी रहे हैं। हमें अपनी राजनैतिक प्रक्रियाओं की पहॅंच, गहराई और गुणवत्ता के बारे में चिंता करने की जरूरत है। एनआरईजीए, जो अब तक के मानव इतिहास में सबसे बड़े रोजगार कार्यक्रम का वादा करता है, के पास भारत के संकट के क्षेत्रों में एक बड़ा धक्का' प्रदान करने की क्षमता है।
डाउनलोड पीडीएफ
आंध्र प्रदेश में सोशल ऑडिटः विकास में एक प्रक्रिया
Kकरूण वकाती आकेल्ला, सौम्या किदाम्बीइकोनॉमिक व पॉलिटिकल वीकली | 4/11/2007
सोशल ऑडिट के पास सार्वजनिक कार्यक्रम के वितरण को अधिक प्रभावी बनाने की क्षमता है। हालांकि, प्रक्रिया अभी विकासशील है, आंध्र प्रदेश में रोजगार गारंटी कार्यक्रम के ऑडिट दिखाते हैं कि क्या संभव है।
डाउनलोड पीडीएफ
क्या रोजगार गारंटी खरी उतरेगी?
मिहीर शाहद हिन्दू | लीडर पृष्ठ | 10/5/2006
2 फरवरी 2006 को अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी ग्रामीण रोजगार गारण्टी कार्यक्रम भारत के 200 जिलों में शुरू किया गया। पिछले वर्ष संसद द्वारा पारित राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (एनआरईजीए) देश में लाखों ग्रामीण बेरोजगारों के लिए काम को एक अधिकार बनाता है।
डाउनलोड पीडीएफ
लेख को ऑनलाइन पढ़ें
दर के सूची का संशोधनः एनआरईजीए के लिए आवश्यक
पी.एस.विजय शंकर, रंगू राव, निवेदिता बैनर्जी व मिहीर शाहइकोनॉमिक व पॉलिटिकल वीकली | 29/04/2006
इस साल की शुरूआत में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (एनआरईजीए) के अंर्तगत कानूनी अधिकारों पर आधारित कई राज्यों में रोजगार गारण्टी योजनाओं की शुरूआत होना एक महत्वपूर्ण ऐतेहासिक विकास है। भारतीय क्षेत्रों में जहॉं सैकड़ों किसान आत्महत्या कर रहे हैं वहॉं उनके पास कुछ तो आस जगी है। लेकिन साथ ही कार्य दर अनुसूची पर एक दृष्टि डालना भी आवश्यक है . .
डाउनलोड पीडीएफ
रोजगार गारंटीः सांसद रास्ता दिखाते हुए
मिहीर शाहद हिन्दू | op-ed page | 10/8/2005
संसदीय स्थायी समिति ने एक सार्वभौमिक, स्व-रोजगार गारंटी का पक्ष लिया है। दिसम्बर 23, 2004 को, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी विधेयक (एनआरईजीबी) को ग्रामीण विकास पर स्थायी समिति, जिसकी अंतिम रिर्पोट अब संसद के समक्ष प्रस्तुत की गई है, के सामने रखा गया।
डाउनलोड पीडीएफ
लेख को ऑनलाइन पढ़ें
एनआरईजीएः एक ऐतेहासिक अवसर
मिहीर शाहइकोनॉमिक व पॉलिटिकल वीकली | 11/12/2004
संसद के चालू सत्र के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (एनआरईजीए) को अधिनियमित करने का प्रस्ताव ग्रामीण भारत में सामाजिक आर्थिक परिवर्तन के लिए ऐतेहासिक मौके का प्रतिनिधित्व करता है।
डाउनलोड पीडीएफ
अवसर और चुनौतियां
रिचर्ड महापात्रा, नेहा सखूजा, संदीप दास, सुप्रिया सिंहरोजगार गारण्टी लोगो के मन में लगातार जगह बनाता जा रहा है। नीति निर्माताओं को इसके विकासशील संभावनाओं पर ध्यान देना होगा
डाउनलोड पुस्तिका - पीडीएफ
एक पारिस्थितिकी अधिनियमः राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम (एनआरईजीए) के लिए एक संदर्भ सामग्री
यह पत्र एनआरईजीए को एक प्रभावी विकास उपकरण की तरह इस्तेमाल करने की पैरवी करता है। यह लेख विकास अवसरों को सूचीबद्ध करने के साथ ही बहुत सारी चुनौतियों को भी चिन्हित करता है।प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका यूनिट द्वारा तैयार
डाउनलोड पुस्तिका - पीडीएफ
आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम के दावे और प्रचालन संबंधित सवाल (2007-08)
सीएच रवि कुमार, डी राकेश कुमार व एस सीतालक्ष्मीयह आलेख एनआरईजीएस-एपी के प्रदर्शन का एक संक्षिप्त विश्लेषण 2007-08 में सरकारी आंकड़ों के आधार पर प्रस्तुत करता है। हमें इस बात का भान है कि इस आलेख में उठाए गए मुद्दे नीति निर्माताओं और पेशेवरों दोनों ही के द्वारा विभिन्न स्तरों पर आलोचना और परिक्षण के दौर से गुजरेंगे और परिचालन की बेहतर प्रक्रियाओं द्वारा विकसित किए जाऐंगे।
डाउनलोड वर्ड डॉक्युमेंट
पारदर्शिता की विजय
सौम्या केरबार्त सिवकुमारसार्वजनिक परियोजनाओं पर सोशल ऑडिट करना कितना कठिन हो सकता है इस बात पर राजस्थान में एक अभियान प्रकाश डालता है।
तो, जब 28 वर्षीय वक्ताराम देवासी 12 गुंडों द्वारा पीटा गया, भरे बाजार में घसीटा गया और बेहोशी की हालत में 6 दिसम्बर को बंसवारा जिले में कुशलगढ़ बस स्टैण्ड पर छोड़ दिया गया, तब उसने जानकारी, जो कि निहीत स्वार्थ छिपाने की सख्त कोशिश कर रहे थे, के लिए अनचाहे ही आधी जंग जीत ली थी।
डाउनलोड वर्ड डॉक्युमेंट
उड़ीसा में एनआरईजीएस के कार्यान्वयन का मूल्यांकन - सोशल ऑडिट रिर्पोट
डॉ.एस राजाकुट्टी(परियोजना निदेशक)राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना(एनआरईजीएस) फरवरी 2005 में देश में 200 जिलों को कवर करने के लिए शुरू की गई थी। दूसरे वर्ष में, यह योजना और 150 जिलों में विस्तारित हुयी।
डाउनलोड वर्ड डॉक्युमेंट
शेड की प्रदर्शन टेस्ट रिर्पोट
ग्रामीण व पर्यावरण विकास समिति (रेड) द्वाराग्रामीण व पर्यावरण विकास समिति (रेड), कादिरी, अनंतपुर ने एनआरईजीएस कार्यक्रम के तहत कार्यस्थलों की सुविधाओं के एक हिस्से के रूप में चार शेडों के मॉडल विकसित किए हैं। इन शेडों की प्रदर्शन टेस्ट रिर्पोट नीचे है।
डाउनलोड पुस्तिका - पीडीएफ
वार्षिक रिपोर्ट
पहली वार्षिक रिपोट
अक्टूबर 2009रोजगार गारण्टी पर जन संगठनों के राष्ट्रीय समन्वय की तीसरी वार्षिक बैठक 13–14 अक्टूबर 2009 को नई दिल्ली में हुई। 13 अक्टूबर को बैठक श्री अरविन्द सोसायटी सभागृह में रखी गई। 14 अक्टूबर को बैठक गुलमोहर, भारत पर्यावास केन्द्र में जारी रही। दोनो दिनों में समन्वय के सदस्यों ने रोजगार गारण्टी से संबंधित अलग–अलग मु्द्दों पर प्रस्तुति की और इन प्रस्तुतियों पर सभा द्वारा गहन विचार विमर्श किया गया। 14 अक्टूबर को एक विशेष समारोह में भारत के ग्रमाीण विकास मंत्री डॅा. सी.पी. जोशी ने समन्वय की पहली वार्षिक रिपोर्ट का लोकार्पण किया। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री नंदन निलेकनी विशेष अतिथि रहे। समन्वय भागीदारों ने डॅा जोशी व श्री निकेलनी से नरेगा व विशिष्ट पहचान में अंर्सम्बन्ध व उनसे जुड़े मुद्दों पर खुल कर चर्चा की।
>डाउनलोड पी.डी.एफ. - अंग्रेजी संस्करण
डाउनलोड पी.डी.एफ. - हिन्दी संस्करण
प्रशिक्षण नियमावली
एनआरईजीए की जलागम कार्य प्रशिक्षण पुस्तिका
बाबा आम्टे लोक सशक्तिकरण केन्द्र, समाज प्रगति सहयोगइस प्रशिक्षण पुस्तक के लिखने के पीछे मूल प्रेरणा यही है कि यह उन सभी के लिए उपयोगी हो जो कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोज+गार गारंटी अधिनियम (रागरोगा) को जमीन पर उतारने के लिए नियोजन, क्रियान्वयन और मूल्यांकन में कार्यरत होंगे। इनमें पंचायत प्रतिनिधि, लोक संगठनों के कार्यकर्ता व सरकारी अधिकारी शामिल हैं, जो कि प्रक्रिया के अलग-अलग पहलुओं से जुड़े हैं।
यह प्रशिक्षण पुस्तक विशेष रूप से मिट्टी की जलागम संरचनाओं पर केन्द्रित है, क्योंकि इन्ही रोजगार-मूलक कार्यों को रागरोगा में प्राथमिकता दी गई है। इस पुस्तक में 17 अध्याय हैं। पहले दो अध्याय राष्ट्रीय ग्रामीण रोज+गार गारंटी अधिनियम का परिचय देते हैं। ये अधिनियम के ऐतिहासिक महत्व को उल्लेखित करते हुए उसकी शासकीय मार्गदर्शिका का सार भी प्रस्तुत करते हैं। अगले 4 अध्याय जलागम विकास के उन मूल सिद्धान्तों पर केन्द्रित हैं जिनके तहत मिट्टी की संरचनाएं निर्मित होंगी। इसमें नक्षों का चित्रण, सर्वेक्षण, ढाल व ऊँचाई का आकलन भी शामिल हैं। इस कार्य के सामाजिक व संस्थागत पहलुओं पर एक पृथक अध्याय है जिन्हें ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनानी होंगी। जलागम कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण संरचनाओं पर अध्याय 7 से 14 में एक-एक अध्याय केन्द्रित हैं। इन अध्यायों में बताया गया है कि ये संरचनाएं क्यों बनाई जाती हैं, उन्हें कहां बनाना चाहिए, कैसे बनाया जाता हैं और ऐसे में क्या सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। अध्याय 15 कार्य दर अनुसूची के उपयोग के बारे में हैं। यह अनुसूची कार्यों के लागत आंकलन में निर्णायक भूमिका अदा करती है। हर संरचना के आंकलन व लागत निर्धारण को उदाहरणों द्वारा समझाया गया है। अध्याय 16 में इन कार्य दरों की मूल अवधारणा पर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए हैं। हम उन कारणों का विस्तार करते हैं जिनके आधार पर इन अनुसूचियों में संशोधन करना अनिवार्य है। अध्याय 17 में डबल एंट्री लेखा पद्धति पर प्रकाश डाला गया है। इसके लिए एक क्रियान्वयन एजेन्सी द्वारा संपादित विभिन्न लेखा कार्यों को माध्यम बना कर, उनके उदाहरण दिए गए हैं।
इस पुस्तिका की प्रतियों आपको कितनी प्रतियां चाहिए और किस भाषा में चाहिए इसके लिए कृपया core@samprag.org पर सम्पर्क करें। हर प्रति की कीमत रू 300/- मात्र है। अगर आप चेक द्वारा भुगतान करना चाहते हैं तो "समाज प्रगति सहयोग" के नाम से बनाया गया चेक आप निम्नलिखित पते पर भेज सकते हैं-
समाज प्रगति सहयोग
बागली
जिला देवास
मध्य प्रदेश-455227
पुस्तिका की सॉफ्ट कापी को आप मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं।
डाउनलोड पुस्तिका- अंग्रेजी वर्णन (पीडीएफ)
डाउनलोड पुस्तिका- हिन्दी वर्णन (पीडीएफ)
फिल्में
रोजगार गारण्टीः दूसरी आजादी की ओरः
समाज प्रगति सहयोग
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी कानून मानव इतिहास के सबसे बड़े रोजगार कार्यक्रम का वादा करता है। यह फिल्म आपको देश और काल का एक रोचक सफर कराती है। रोजगार गारण्टी कानून की यात्रा 1920 की आर्थिक महामंदी से शुरू होती है।
हम आपको भारत की उन अनसुनी आवाजों से रुबरू कराते हैं जो देश के ग्रामीण पिछवाड़ों में बसते है। ये लोग उस दुर्गति की कहानी अपनी जुबानी उजागर करते हैं जिसके कारण यह कानून पारित हुआ। साथ ही कार्यक्रम की समस्याओ और इसे सफल बनाने के अपने प्रयासों को भी कहते है।
सही रूप से क्रियान्वित होने पर यह कार्यक्रम पर्यावरण को सुधारते हुए, करोड़ों ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध करा सकता है। साथ ही शिथिल ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था को नई ऊर्जा दे सकता है।
फिल्म में रोजगार गारण्टी की अनंत संभावनाओं का प्रत्यक्ष सबूत मिलता है। और इन संभावनाओं को सच में बदलने के लिए वांछित सुधारों का उल्लेख भी।
जलागम विकास पर फिल्में
समाज प्रगति सहयोग
इन 5 फ़िल्मों में पानी की समस्या के सरल व टिकाउ उपाय बताए गए हैं। जिनका उपयोग गांव के लोग उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर बड़ी आसानी से कर सकते हैं। यह फ़िल्में आपको जलागम विकास की जटिल प्रतीत होने वाली बारीकियों से परिचित कराएंगी। संरचनाओं का स्थान चयन, डिजाइन और निर्माण सभी समझाया गया है। प्रकृति की अपरिमित विविधता के अनुकूल विकास, दरअसल कितनी सृजनशीलता का काम है, इसका आनन्द आप ले सकेंगे। इन फिल्मों में विकास की एक नई अवधारणा की झलक मिलती है। जो कि प्रकृति पर अपना वर्चस्व थोपने के बजाय, अपने आप को प्रकृति के नाजुक ताने-बाने ढालने का प्रयास करती है। ऐसा विकास जो आजीविका सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण व लोक सशक्तिकरण, तीनों एक साथ हासिल करने में सक्षम है।